हिंदी दिवस के अवसर पर शिक्षक एवं छात्रों की जुगलबंदी के रंग बिखेरता अनोखा कवि सम्मेलन

Updated: Aug 5

14 सितंबर 2021, हिंदी भाषा एवं साहित्य को समर्पित वैश्विक पटल पर सुप्रतिष्ठित समूह ‘हिंदगी,हिंदी है ज़िंदगी’ द्वारा 'हिंदी दिवस' के अवसर पर 'हिंदगी उत्सव' के अंतर्गत आयोजित 'अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन' की खास बात रही इसकी परिकल्पना जिसने शिक्षक एवं उनके छात्रों को एक साथ एक ही मंच पर आने का स्वर्णिम और यादगार अवसर दिया।

साथ ही #हिंदगी मौलिक रचनाओं से हिंदी के सामर्थ्य को उसके वैभव को सामने लाने का भी सुअवसर प्रदान किया। कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्यालयों से प्रबुद्ध हिंदी भाषा शिक्षक एवं उनके प्रतिभाशाली छात्र जुड़े और हिंदी भाषा को केंद्र में रखकर अपनी स्वरचित बेहतरीन काव्य रचनाएँ प्रस्तुत कीं। हिंदगी, हिंदी है ज़िंदगी समूह के संस्थापक, शिक्षाविद डॉ ऋषि शर्मा ने बताया कि ऐसी परिकल्पना को साक्षात निरूपित होता देखना किसी अनुभव से कम नहीं अपने आप में प्रेरक और ऐतिहासिक बन गए इस कार्यक्रम ने ये सिद्ध कर दिया कि हो न हो हिंदी का भविष्य हमारे शिक्षकों के हाथों में ही है क्योंकि भाषा संस्कारों ,मूल्यों की समवाहिनी होती है और ये मूल्य और संस्कार अगली पीढ़ी तक हस्तांतरित हों और पूरे आत्मविश्वास और गौरव के साथ नई पीढ़ी के मन, मस्तिष्क और कृतित्व में अंकुरित होकर प्रत्यक्ष लक्षित हों ये उत्तरदायित्व शिक्षकों का है। इस अनोखे कवि सम्मेलन ने यह सुनिश्चित कर दिया कि हिंदी का भविष्य स्वर्णिम है और आने वाली पीढ़ी में ही कल के प्रेमचंद और महादेवी वर्मा छिपे हैं बस आवश्यकता तलाशने और तराशने की है। सही और प्रेरक मार्गदर्शन हिंदी के प्रति प्रेम, गौरव के बीज और संस्कार हस्तांतरित करने का काम करेगा। हर प्रस्तुति ने ये सिद्ध कर दिया कि गुरु चाहें तो भाषा के संस्कार बच्चे में शुरुआत से पैदा कर सकता है। इस कवि सम्मेलन का संचालन जाने माने वक़्ता, कवि, लेखक एवं पत्रकार श्री त्रिलोकनाथ पाण्डेय जी ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध कवि ,साहित्यकार एवं शिक्षक संसाधक व भाषा सेवी, डॉ विनोद प्रसून जी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को गौरवांवित किया साथ उन्होंने इस अवसर पर अपने बेहतरीन हिंदी गीत भी प्रस्तुत किए। अतिथि महोदय ने हर प्रस्तुति का मनोबल बढ़ाया और यह आवाह्न किया कि हिंदी भाषा के प्रति संस्कार देने का उत्तरदायित्व शिक्षको को निभाना चाहिए। शिक्षक_एवं_छात्रों की कविताओं की इस अनोखी जुगलबंदी में देवास , मध्यप्रदेश से यशोधरा भटनागर अपनी छात्रा अनुष्का राठौड़ के साथ, पूर्णिमा सिंह भारतीय विद्यालय, अल घुबरा, मस्कट, ओमान से अपनी छात्रा जुमाना वोहरा के साथ व डी.पी. एस. स्कूल, दोहा , क़तर से शालिनी वर्मा अपनी शिष्या क्रिएषा शर्मा के साथ तथा लुधियाना के सी.एम.प्रेज़िडेंसी स्कूल से पूर्वा सिंह जी अपने छात्र चैतन्य रामकृष्ण काले

के साथ कार्यक्रम से जुड़े। इनके साथ ही जयपुर से रेनू शब्दमुखर विभागाध्यक्षा (हिंदी)ज्ञान विहार स्कूल, जयपुर , राजस्थान से अपनी शिष्या हर्षल गोयल के साथ विजय लक्ष्मी जांगिड़,एम.पी.एस. इंटरनेशनल स्कूल, जयपुर , राजस्थान से अपने छात्र हर्ष शर्मा, व शालिनी अग्रवाल अपनी छात्रा अवनि अग्रवाल के साथ तथा विनीता मिश्रा अपनी शिष्या चैताली पांडे के साथ कार्यक्रम से जुड़ी और एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी।


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