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हिजाब बनाम राजनीति

Updated: Aug 5, 2022

"अपना भारत" जी हां अपना देश भारत । अपनी संस्कृति की वजह से अनेकों विविधताओं के पश्चात भी एकता का वह संगम है। जो कहीं भी किसी और देश में नहीं मिलता । भारत आज दुनिया से कदम से कदम मिलाकर शिक्षा की सर्वोच्च उंचाई की ओर अग्रसर है ।

आज भारत की बेटियां बेटों से किसी भी तरह कम नहीं हैं। हर बेटी आज पुरानी बेड़ियां तोड़ कर खुले आकाश में विचरण करने की ओर अग्रसर है पढ़ लिखकर अपना भविष्य खुद बनाने को तत्पर हैं अपना अच्छा बुरा खुद सोच सकती है और आत्म विश्वास से लबरेज है । और हर क्षेत्र में कामयाबी के झंडे गाड़ रही है भारत की बेटियों ने ऐसे कई उदाहरण पेश किए है और आज उन्हें जरुरत है अपने पंख पुर्णतह खोलने की और उस सोच को बदलने की । समाजिक नियम व पुरानी सोच जैसी अड़चनों से जूझ कर उसने यह मुकाम हासिल किया है । बहुत कुछ बदला है और बहुत कुछ बदलना अभी बाकी है । उस सोच को जो आपके बढ़ते कदमों को रोक कर पीछे ढकेल रही है । तो अपने आप से पुछो "क्या ये सही है?"


हमारे शिक्षा संस्थानों में कुछ नियम व ड्रेस कोड लागू किये है और वो इसलिए की अमीर-गरीब उंच-नीच चाहे वह किसी भी धर्म का क्यों न हो सभी एक बराबर महसूस कर सकें । किसी प्रकार से भेदभाव न हो अनेकता में एकता के सिद्धांत पर ये नियम बनाए गए हैं । जो पिछले कई वर्षों से लागू है।


और उनका पालन हर धर्म के लोग बिना किसी आनाकानी के करते आ रहे हैं। तो फिर बेवजह विवाद क्यों ?

आज भारत वर्ष की बेटियां खुले आसमान में उड़ना चाहती है घुंघट और हिजाब को बहुत पीछे छोड़ कर उन्होंने अपनी अलग ही पहचान कायम की है । उन्हें आज हिजाब की राजनीति में उलझते देख आश्चर्य हो रहा है। जिस हिजाब को ज्यादा तर लड़कियां अपनी तरक्की में अड़चन समझती थी बाधा समझती थी वहीं आज हिजाब की पैरवी करती नज़र आ रही है।


यदि हिजाब किसी को पसंद है और अपनी मर्जी से पहनना चाहती है तो स्कूलों को छोड़कर कहीं भी पहन सकती है कौन रोक रहा है।


मगर किसी भी शिक्षा संस्थान का अपना नियम होता है वहां वह अपने नियमों का ही पालन करेंगे । अपनी इगो वो जिद की वजह से अपना ही नुकसान करोगे ।

एडमिशन के समय यदि नियमों को मानने से इंकार करोगी तो हो सकता है वहां एडमिशन ही न मिले और आपको सेकेंड या थर्ड या उससे भी निचे का आप्शन में जाना पड़े । क्या ये आपकी काबिलियत के लिए सही होगा ? आप चाहते हैं की यदि आप अपनी योग्यता के अनुसार न. एक विद्यालय में पढ़ने के हकदार हैं तो न. दो या तीन या उससे निचे के विद्यालय या मदरसों तक ही सीमित रहना चाहोगे । सोच कर देखो हिजाब ज्यादा जरूरी है या पढ़ाई ?


राजनिति तुम्हारा काम नहीं है तुम्हारे अच्छे भविष्य के लिए पढ़ाई पर ध्यान दो नेताओं की बातों में आकर अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ मत करो ।


आज ये पार्टियां जो आपके समर्थन में बयान बाजी करके अपना उल्लू सीधा कर रही है वो आपके क्या काम आएगी ये सारे नेता आज चुनाव के माहौल में आप सभी को बहका कर अपना मतलब निकलने के बाद कहां गायब हो जाएंगे पता भी नहीं चलेगा ।


किसी भी अच्छी पोस्ट के लिए हिजाब परेशानी खड़ी कर सकता है ।और उस वजह से कई अच्छे मौके गंवाने पड़ सकते हैं।


हिजाब हो या घुंघट नारियों को पिछड़ी सोच की ओर ढकेल देते हैं । आपको सिर्फ यह सोचना है कि आप ज्यादा से ज्यादा पढ़ लिखकर खुले आसमान में उड़ना चाहती हो या कुंए के मेंढक की तरह बंदिशों के साथ जीना चाहती हो ? और यह फैसला करने का हक तुम्हें और सिर्फ तुम्हें है किसी और को नहीं । इन नेताओं को तो बिल्कुल ही नहीं ।


~लेखक गौतम जैन

प्रकाशित रचनाएं -

{ एकल काव्य संग्रह }

* समंदर सी धड़कन * (प्रकाशित)

{ एकल लघुकथा संग्रह }

* चमकते मोती *(प्रेस में)

{ एकल मुक्तक संग्रह }

* कुछ कहा है तुम्हें देख कर...* (प्रेस में)

( लघुकथा संग्रह )

* साहित्य के प्रकाश पुंज *

(सांझा कहानी संग्रह )

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( साक्षात्कार विशेषांक )

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सम्मान - अटल बिहारी वाजपेई हिंदी साहित्य सम्मान , काव्य कर्ममणि सम्मान , शब्द साधक साहित्य सम्मान , काव्य श्री साहित्य सम्मान , वीणा वादिनी साहित्य सम्मान , काव्य शिरोमणि , सम्मान , वागेश्वरी साहित्य सम्मान , साहित्य के प्रकाश पुंज सम्मान आदि । " आगमन " साहित्य संस्था द्वारा छत्तीसगढ़ समारोह में साहित्य सम्मान ,काव्योदय, आगाज, उड़ान , साहित्य किरण मंच व अन्य साहित्य संस्था द्वारा बहुत सी रचनाओं को सर्व श्रेष्ठ रचना पुरस्कार




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