पितृसत्ता के जुल्म से उपजी एक विद्रोही स्त्री--फूलन

Updated: Aug 5

फूलन एक स्त्री नही है फूलन एक विद्रोही है ,फूलन पितृसत्ता के प्रति प्रतिरोध है ,फूलन जाति के नशे में डूबे आततायियों के लिए खौफ का प्रतीक है।


अन्याय और जुल्म की सीमा जब पार होती है तो बेजान में ही सबसे पहले जान आती है।फूलन देवी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।फूलन का मामला जाति से जुड़ा मामला ही नही है बल्कि वो पितृसत्ता से जुड़ा मामला है।वो उस पुरुष मानसिकता से जुड़ा मामला है जो ये मानती है कि लड़कियां केवल नोचने खसोटने, शादी ,बच्चे पैदा करने और गृहस्थी का बोझ उठाने के लिए पैदा होती हैं।याद रखिये फूलन देवी का पहला बलात्कार उसके पति ने ही किया था जो उसी के समुदाय का था ।फूलन देवी जब 10 साल की थी तभी उसकी शादी उसके ही समुदाय के 40 साल के आदमी से कर दी गयी थी।पति ने रेप किया उसे घर से निकाल दिया दूसरी शादी कर ली।वापस गांव आयी तो शोषण का चक्र जारी ही रहा।पूरे गांव के सामने उसे नँगा किया गया,पुलिस थाने तक मे उसके साथ बलात्कार हुआ।कोई और होता तो शायद मर जाता लेकिन फूलन ने प्रतिशोध का रास्ता चुना क्योकि उसके पास कोई उपाय ही नही था क्योकि समाज, परिवार,सिस्टम सब उसके शोषण के जिम्मेदार थे।कभी-कभी जिंदगी आपके सामने दो ही रास्ते छोड़ती है या तो कायरों की तरह मर जाइए या फिर अपने अन्याय और जुल्म का प्रतिकार कीजिये।एक बार बैंडिट क्वीन देखिये आपको अपने समाज पर शर्म आएगी,सिस्टम पर शर्म आएगी,यहाँ तक कि पुरुष होने पर भी शर्मिंदा होंगे आप ।

एक सिरफिरे ने जिसका नाम शेर सिंह राणा था उसने फूलन को गोली मारी और उसे लगा कि उसने 22 ठाकुरों का बदला लिया। अगर उसे सच मे राजपूत होने पर गर्व होता तो उसे तो फूलन के पैर पकड़कर माफी मांगना था क्योकि कम से कम राजपूतों का इतिहास औरत की मर्यादा की रक्षा के लिए प्राण देने का रहा है न कि उसकी इज्जत तार-तार करने का।उस जातीय अहंकार में डूबे आदमी के नाम मे राणा लगा है कम से कम जिन्हें राजपूत अपना आइकॉन मानते है उन राणाप्रताप से ही वो कुछ सीखते।एक घटना बताता हूँ एक बार राणा प्रताप के बेटे ने अजमेर के गवर्नर खान-खाना को उनके परिवार के बच्चो और महिलाओं सहित बंदी बना लिया जब राणा को ये बात पता चली तो उन्होंने बेटे को बहुत डाँटा और कहा कि इन्हें सम्मान के साथ वापस भेजो ये खान खाना और कोई नही हिंदी के प्रसिद्ध कवि रहीम थे।लेकिन इस सिरफिरे ने उस फूलन को गोली मारी जिसके साथ इसके जाति के लोगो ने बलात्कार किया,जो उस समय हंस रहे थे जब उसे पूरे गांव के सामने नँगा करके कुएं से पानी भरने को बोला गया।अरुंधति राय ने लिखा कि जेल में फूलन से बिना पूछे ऑपरेशन कर उनका यूटरस निकाल दिया गया. डॉक्टर ने पूछने पर कहा- अब ये दूसरी फूलन नहीं पैदा कर पायेगी. एक औरत से उसके शरीर का एक अंग बीमारी में ही सही, पर बाहर कर दिया जाता है और उससे पूछा भी नहीं जाता।फूलन एक स्त्री नही है फूलन एक विद्रोही है ,फूलन पितृसत्ता के प्रति प्रतिरोध है ,फूलन जाति के नशे में डूबे आततायियों के लिए खौफ का प्रतीक है।जब-जब ऎसे अत्याचार होंगे फूलन पैदा होंगी भले से वो किसी भी कोख से पैदा हो।इस विद्रोही स्त्री को मेरा नमन है और इस समाज पर लानत और शर्म है जो फूलन को डाकू फूलन देवी बनने पर मजबूर करता है।


The Writer is Professor at Osmania University (Hyderabad)


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