भारत में बलात्कार की जमीनी हकीकत

Updated: Aug 15

कोई भी देश यस के शिखर पर तब तक नहीं पहुंच सकता जब तक उसकी महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर ना चले

मैं भारत की नारी हूं, मुझे यहां देवी का रूप माना जाता है। पर मुझे कभी देवी की उन शक्तियों का अनुभव नहीं हुआ । क्योंकि समाज ने मुझे यह बताया कि 'महिलाएं कमजोर' हैं | मनु स्मृति (भारत की प्राचीन पुस्तक) मैं तो यहां तक कह दिया गया है कि-

पिता रक्षति कौमारे भर्ता रक्षति यौवने ।

पुत्रो रक्षति वार्धक्ये न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति ॥

स्त्री को कभी भी स्वतंत्र नहीं छोड़ना चाहिए। स्त्री को बचपन में पिता, युवावस्था में पति और जब उसका पति मर जाता है, तो पुत्र के नियंत्रण में रहना चाहिए-

मैं नहीं जानती कि कोई कैसे महिलाओं को भगवान कहता है लेकिन वास्तव में महिलाओं को इंसानों की तरह भी सम्मान नहीं मिलता |

विडंबना यह है कि महिलाओं को देवी का दर्जा देने वाले देश में (2019 ) की एनसीआरबी रिपोर्ट(NCRB) के मुताबिक हर 16 मिनट में देश में एक रेप होता है |

हमारे प्राचीन ग्रंथों में बहन की इज्जत के लिए पूरे रामायण हो जाया करती थी | आज उसी देश में 93.9 % रेप करने वाले अपराधी जाने वाले या घर के होते हैं |

2019 के अनुसार भारत में महिलाओं के खिलाफ बलात्कार चौथा सबसे आम अपराध है और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की वार्षिक रिपोर्ट में देश भर में 4,05,861 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए, या औसतन 87 बलात्कार प्रतिदिन होते हैं।

एक रिपोर्ट से पता चलता है कि 91.6% रेप के मामले दर्ज ही नहीं कराए जाते हैं |क्योंकि पीड़िता को डर होता है,कि अपराधी सजा पूरी होने के बाद में उसे नुकसान पहुंचा सकता है | वह नहीं चाहती कि समाज उसके साथ हुए रेप के बारे में जाने |उसके मन में हमेशा डर होता है कि कहीं अपराधी गलत बयानों से बच जाता है, तो वह उसके लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है | कोर्ट में केस लंबे चलने के कारण भी उसके मन में डर बैठ जाता है |


हां यह कहना सही है कि 'बलत्कार बलत्कार' है | यह किसी भी जाति या श्रेणी से संबंधित नहीं है | लेकिन यह भी एक वास्तविकता है, कि ज्यादातर महिलाएं दलित बहुजन और आदिवासी समाज की होती है | जिन्हे यौन हिंसा और उत्पीड़न के लिए निशाना बनाया जाता है , और कुछ ही महिलाओं को इंसाफ मिल पाता है |

NCRB के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि हर दिन चार से अधिक दलित महिलाओं के साथ बलात्कार होता है जो पीड़ित के लिए कानूनी सुरक्षा की कमी को दर्शाता है।

वास्तविकता यह है कि अपराधी को सजा कम मिलती है और पीड़िता को सत्य बताने के लिए भी कई कानूनी परीक्षण जैसी सजाओ से गुजरना पड़ता है उसके बावजूद भी गिने-चुने केसों में ही अपराधी को सजा मिलती है ज्यादातर मामले या तो अदालत में झूठ बता दिए जाते हैं | या सबूतों की कमी के कारण खारिज कर दिए जाते हैं |

यही हालत हाथरस बलात्कार मामले में भी दिखाई देते हैं 19 साल की दलित महिला के साथ चार उच्च जाति के लोगों ने बलात्कार किया | प्रशासन ने केस को दबाने के लिए उसकी लाश को रात के अंधेरे में ही कूड़े की तरह जला दिया | सुबह होने तक रिपोर्ट में मौत का कारण बलात्कार नहीं बल्कि रीड की हड्डी में चोट को बताया गया |

दिल्ली से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. दिल्ली में कैंट एरिया में एक 9 वर्षीय दलित बच्ची का दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई और उसका शव का अंतिम संस्कार करने की खबर सामने आ रही है।

बलात्कारियों को बचाने के लिए पुजारी ने लाश को जबरन जला दिया. कभी हाथरस में लड़किया जबरन जलाई जाती है तो कभी दिल्ली में।

भारत और अन्य जगहों की कई रिपोर्ट से पता चला है कि 'क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम' समाज का आधार है जिसमें कमजोर तबका भी शामिल है, जो महंगे वकील का खर्च नहीं उठा सकता है या अपने मामले को उच्च न्यायालयों में अपील नहीं कर सकता है। क्या उसे सही न्याय मिल पाता है या नहीं ?

NCRB की रिपोर्ट 2018 में पाया गया कि भारतीय जेल में SC और ST का प्रतिनिधित्व अधिक है। परीक्षण के तहत हर तीन में से एक या तो एससी या एसटी है। इसके अलावा भारत में तीन चौथाई मौत के कैदी निचली जाति या धार्मिक अल्पसंख्यकों से हैं। यह आंकड़े भारत में क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की साफ तस्वीर पेश करते हैं कि यह हमारे प्रणाली में किस तरह कार्य कर रहा है |

हमारे देश की ऐतिहासिक वास्तविकता यह है कि भारत में गैंगरेप जैसी घटनाएं एक दिनचर्या है। हर बार लोग सड़कों पर मोमबत्तियां लेकर निकलते हैं | दो-चार दिन तक मीडिया भी कवरेज देता है, और कुछ समय बाद किसी की जिंदगी राजनीति का मुद्दा बन कर रह जाती है, ना सजा मिलती है ना इंसाफ | यह हमारे कानून और व्यवस्था की खामियों को दिखाता है | हमारे समाज में रेप पीड़िता अगर बच भी जाती है तो उसे 'जिंदा लाश' की तरह देखा जाता है इस मानसिकता की वजह से ज्यादातर रेप पीड़ित बचने पर भी आत्महत्या कर लेती है | क्योंकि हमारे समाज में महिलाओं के सम्मान को आंतरिक रूप से उनकी 'कामुकता' से संबंधित करते हैं न कि उनकी प्रतिभा के साथ।

हमारे समाज में लोग ऐसा सोचते हैं कि जिन महिलाओं के साथ यौन शोषण हो जाता है उनके लिए समाज में कोई स्थान नहीं रहता, वह अपना सम्मान खो देती है | हमें इस रूढ़िवादी सोच को बदलने की जरूरत है | मेरा मानना है कि बलात्कार पितृसत्ता और हिंसा की कार्रवाई का एक उपकरण है और इसका नैतिकता चरित्र या व्यवहार से कोई लेना-देना नहीं है।

हां बलात्कारी को जल्द से जल्द कड़ी सजा या मृत्यु दंड देना जरूरी है | ताकि कोई भी दोबारा ऐसा करने की कोशिश ना करें | इसके अलावा रेप पीड़ितों के लिए चिकित्सा और सहायता के लिए वातावरण बनाने बनाने की आवश्यकता है ताकि कोई भी रेप पीड़िता 'जिंदा लाश' की तरह महसूस ना करें |


हम इस समस्या का कैसे निवारण कर सकते हैं जानने के लिए पढ़ें - महिलाएं भी आजादी चाहती हैं


GROUND REALITY OF RAPE IN INDIA

No country can reach the summit until its women walk shoulder to shoulder.

I am a woman of India; I am considered as a goddess here. But I never felt those powers of Goddess. Because society told me that 'women are weak'. Manu Smriti (Ancient Book of India) I have even been told that

||Father Rakshti Kaumare Bharta Rakshti Yauvane.

Sons, protect women, women free ||

A woman should never be left independent. The woman should be in control of the father in childhood, husband in puberty and son when her husband dies -

I do not know how someone calls women God but in reality women do not get respect like humans.

Ironically, according to the NCRB report (2019) in the country which gives women the status of Goddess, every 16 minutes there is a rape in the country.

In our ancient texts, the entire Ramayana used to be used for the respect of the sister. Today in the same country 93.9% of raped criminals are outgoing or homebound.

As of 2019, rape against women is the fourth most common crime in India and the National Crime Records Bureau (NCRB) annual report recorded 4,05,861 rape cases nationwide, or an average of 87 rapes per day.

A report shows that 91.6% of rape cases are not registered at all. Because the victim fears that the culprit may harm him after completion of the sentence. She does not want the society to know about the rape that happened to her. There is always fear in her mind that if the culprit is saved from making false statements, then he can make it difficult for her. Due to the long running case in the court, fear comes in his mind.

Yes, it is correct to say that ‘rape is rape’. It does not belong to any caste or category. But it is also a reality that most of the women belong to Dalit Bahujan and tribal society. Those who are targeted for sexual violence and harassment, and few women get justice.

NCRB data also shows that more than four Dalit women are raped every day, reflecting the lack of legal protection for the victim.

The reality is that the culprit gets lesser punishment and the victim has to undergo many legal tests like punishment to tell the truth, despite the fact that only in a few cases the criminal gets the punishment. Mostly cases are rejected due to lack of evidence.

The same situation appears in the Hathras rape case as well. A 19-year-old Dalit woman was raped by four upper caste people. The administration burnt his corpse like garbage in the dark of night to suppress the case. By morning, the report stated that the cause of death was not rape but injury to the back bone.

A heart-wrenching case has come to light from Delhi. A 9-year-old Dalit girl was raped and murdered in the Cantt area in Delhi and the news of her body being cremated is coming to the fore.

To save the rapists, the priest forcibly burnt the body. Sometimes girls are forcibly burnt in Hathras and sometimes in Delhi.

Several reports in India and elsewhere have shown that the 'Criminal Justice System' is the basis of society including the weaker sections, who cannot afford expensive lawyers or appeal their case to the High Courts. Does he get the right justice or not?

NCRB report 2018 found that SC and ST are over-represented in Indian jails. One out of every three under test is either SC or ST. In addition, three-fourths of death prisoners in India are from lower caste or religious minorities. These figures give a clear picture of the criminal justice system in India, how it is working in our system.

The historical reality of our country is that incidents like gang rape are a routine in India. Every time people come out on the streets carrying candles. The media also provides coverage for two to four days, and after some time one's life becomes an issue of politics, neither punishment is received nor justice. It shows the flaws of our law and order. Even if the rape victim survives in our society, she is seen as a 'living corpse', due to this mentality, most rape victims commit suicide even after being saved. Because in our society, respect for women is intrinsically related to their 'sexuality' and not to their talent.

People in our society think that women who are sexually abused have no place in the society, they lose their respect. We need to change this conservative thinking. I believe that rape is a tool for the action of patriarchy and violence and has nothing to do with morality, character or behavior.

Yes, it is necessary to punish the rapist as soon as possible. So that no one tries to do it again. Apart from this, there is a need to create an environment for healing and support for rape victims so that no rape victim feels like a 'living corpse'.

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