महिलाएं भी आजादी चाहती हैं

Updated: Aug 5

आज पूरे देश में बड़े जोरों शोरों से स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है आजादी के 74 साल बाद भी देश की आधी आबादी- 'महिलाएं' स्वतंत्र नहीं हो पाई है। बड़े संघर्ष के बाद महिलाएं ऊंचाइयों पर तो पहुंची हैं पर लड़को के बराबरी तक नहीं पहुंच पायी। आज भी लिंग भेदभाव भारत में एक बहुत बड़ा मुद्दा है। मैंने लोगों को महिलाओं के उपलब्धियों के बारे में बात करते देखा है ,चाहे वह शिक्षा, खेल, मीडिया, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, आदि से संबंधित हो। वह कहते हैं कि महिलाएं उत्तरोत्तर हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर रही हैं लेकिन वह उस सफलता के पीछे उन संघर्षों की बात नहीं करते कि उन्हें कितने चुनौतियों का सामना करना पड़ा था और आज भी करना पड़ रहा है।



यह कहना आसान है कि महिलाएँ 21 वीं सदी में पुरुषों के बराबर हैं, लेकिन अगर हम संघर्ष को देखे तो महिलाएँ को पुरुषों की तुलना में अधिक संघर्ष करती हैं। उन्हें घर से बाहर जाने पर समाज की रूढ़िवादी सोच का सामना करना पड़ता है उन्हें सामाजिक,आर्थिक और राजनितिक जीवन में भी असमानता का सामना करना पड़ता है । बहुत बार महिलाएं अपने आप को उच्च लक्ष्यों के लिए रोकती हैं क्योंकि उनके माता-पिता, समाज के डर से उन्हें अनुमति नहीं देते कि वो भी ऊचाइयो पर जाये। हमारे समाज में आज भी लोग ऐसा मानते हैं कि महिलाएं केवल घर का काम और बच्चों की देखभाल के लिए बनी है वह रूढ़िवादी लोग घर के अंदर रहने वाले महिलाओं को सभ्य कह कर बुलाते हैं और जो महिलाएं अपने लक्ष्य और सपनों को पूरा करना चाहती है और उड़ान भरना चाहती हैं उनको असभ्य और चरित्रहीन कह कर बुलाते हैं, इतने संघर्षों के बावजूद भी महिलाओं ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। उदाहरण के लिए, हम 2019 में देखते हैं कि पुरुषों की संख्या की तुलना में महिलाओं ने डु कॉलेजों के लिए 80,000 अधिक प्रवेश फार्म भरे हैं। 2019 में लड़कियों और लड़कों के बीच स्कूल में नामांकन दर यह साबित करती है कि उन्होंने किस दर से सफलता हासिल की। हमारे पास उनकी प्रतिभा दिखाने के लिए बहुत सी कहानियाँ हैं जबकि उनके परिवारों ने उन्हें लड़कों की तरह बहुत अधिक समर्थन नहीं किया। एक बहुत अच्छा उदाहरण उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की आईएएस वंदना चौहान हैं, वह रूढ़िवादी परिवार से हैं, महिलाओं की ताकत का सबूत है। यह इस बात का प्रमाण है कि अगर हम महिलाओं को लड़को के बराबर सम्मान और अवसर प्रदान करें तो वह लड़कों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

मुझे यह जानकर बड़ा आश्चर्य होता है कि भारत में हर कोई एक लड़का बच्चा चाहता है क्योंकि लोग मानते हैं कि लड़कों से ही वंश चलता है और वही बुढ़ापे का सहारा बनते हैं। पर सच तो यह है कि लड़कियों के बिना ना तो कोई समाज होगा और ना ही कोई वंश। आखिर क्यों लड़कियों को ही शादी के बाद ससुराल जाना पड़ता है? ऐसा भी हो सकता है यदि अगर किसी मां बाप पर दो लड़कियां हो तो वह शादी के बाद लड़कों को भी घर ला सके। इससे लिंग भेदभाव भी खत्म होगा और लोगों की फिक्र भी कि उनका बुढ़ापे का सहारा कौन बनेगा । इससे दोनों ही लोगों को बराबरी का सम्मान मिल पाएगा। यह समय रूढ़िवादी प्रथाओं को खत्म करने का है तभी देश में उन्नति होगी और सभी लोगों को बराबरी का हक मिल पाएगा और इसकी पहल हम लोगों से ही होगी।

लड़कियों के साथ भेदभाव मां के कोख से शुरू होकर उनके आखरी सांसो के साथ खत्म होता है। मुझे लगता है लड़की को मां की कोख में मार देना ही बेहतर है बजाय इसके कि वह पूरे जीवन पीड़ित और असमानता का सामना करती रहे। यह कुछ इस तरीके से ही है जैसे किसी को तड़पा तड़पा कर मारना। हमारे देश में, हम समानता के बारे में बात करते हैं लेकिन आज मैं यह सवाल पूछती हूं कि 'घरेलू काम करने वाले कितने पुरुष हैं' ? किसी ने भी इस समानता के बारे में बात नहीं की। अगर महिलाएं परिवार में पुरुषों के बराबर कमाती हैं तो पुरुषों को अधिक श्रेय क्यों मिलता है? जहाँ महिलाएँ दोहरा काम करती हैं। हमारे समाज में हर दिन तलाक और पारिवारिक अलगाव के मामले बहुत तेजी से बढ़ते जा रहे हैं, इसके पीछे का कारण क्या है? मुझे लगता है कि एक तरफ हम कहते हैं कि महिलाएं पुरुषों के समान हैं उन्हें संविधान में पूरे हक़ दिए गए हैं। हमने उन्हें इतना शिक्षित व जागरूक तो कर दिया है कि उन्हें अपने अधिकार पता चल गए हैं। पर समाज उन अधिकारों को मानने के लिए तैयार नहीं है और ना ही वह उनको बराबरी का हक देते हैं इसी कारण से पारिवारिक अलग के मामले हमारे देश में बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। यह कुछ इस तरीके से है कि हमने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नीतियां तो बनाई है पर एक वातावरण नहीं बनाया जहां वह नीतियां काम कर पाए।

इतनी सारी उपलब्धियों के बाद, 21-सदी की महिलाएं घर से बाहर जाने में डरती महिलाएं यौन उत्पीड़न, बलात्कार, एसिड अटैक, बाल विवाह, भावनात्मक अवसाद, बिना अनुमति के घर से बाहर जाने, पति की हिंसा, तल्ख और कई बेशुमार चुनौतियों का सामना करती है। महिलाओं को निशाना बनाया जाता है और उन घिनौनी हरकत करने वाले लोगों को सालों सालों तक बिना सजा के छोड़ दिया जाता है यह कैसा इंसाफ है? आखिर क्यों उन लोगों को जल्दी सजा नहीं दी जाती है ताकि कोई भी दूसरा व्यक्ति उस अपराध को करने से पहले हजार बार सोचे।

हमें महिलाओं की राह आसान बनाने की जरूरत है ताकि वह भी अपना लक्ष्य आसानी से हासिल कर सके और स्वतंत्रता को महसूस कर सकें। यह तभी संभव होगा जब हम अपने बच्चों को अच्छी परवरिश देंगे क्योंकि लिंग भेदभाव की जड़ बचपन में शुरू होती है जब हम लड़कों को ज्यादा अवसर और लड़कियों को कम अवसर देते हैं। एक छोटा बच्चा नहीं जानता कि वह कमजोर है या बहादुर है। समाज के विचार उन्हें कमजोर या मजबूत बनाते हैं। लड़का खुद के लिए पढ़ता है लेकिन लड़कियां पूरे समाज के लिए पढ़ती हैं। मैं हर माता-पिता से अनुरोध करती हूं कि वे अपनी बेटी को हर क्षेत्र में समान अवसर दें और अपने बेटे को हमेशा महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने सशस्त्र बल और पैतृक भूमि में महिलाओं को समान अवसर दिया है। सरकार ने भी महिलाओं की प्रगति के लिए बहुत सी योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन ये सभी योजनाएं तभी सफल होंगी जब समाज महिलाओं के प्रति अपनी मानसिकता को बदलेंगे। देश की प्रगति के लिए हमें रूढ़िवादी सोच को खत्म करना ही होगा तभी देश में विकास संभव हो पाएगा। जिस दिन महिला और पुरुष एक समान अवसर के साथ मिलकर काम करना शुरू कर देंगे, उस दिन हमारी देश की प्रगति को कोई नहीं रोक पाएगा।


Women Want's Freedom


Today, Independence Day is being celebrated in full swing in the entire country, even after 74 years of independence, half the population of the country - 'women' have not been able to become independent. After a big struggle, women have reached the heights but they have not reached the equal of the boys. Even today gender discrimination is a very big issue in India. I have seen people talking about women's achievements, whether it is related to education, sports, media, science, technology, medicine, etc. He says that women are progressively getting success in every field, but he does not talk about the struggles behind that success how many challenges they faced and still have to do today.

It is easy to say that women are equal to men in the 21st century, but if we look at conflict, women struggle more than men. They have to face the conservative thinking of the society when they go out of home. They also have to face inequality in social, economic and political life. Many times women stop themselves for higher goals because their parents do not allow them to go to the higher ranks due to fear of society. In our society even today, people believe that women are made only for household work and child care, that orthodox people call women living inside the house civilized and women who want to fulfill their goals and dreams. And they want to fly, calling them rude and characterless, despite so many struggles, women have done very well. For example, in 2019 we see that women have filled 80,000 more admission forms for du colleges than the number of men. The school enrollment rate among girls and boys in 2019 proves the rate at which they achieved success. We have many stories to show his talent while his families did not support him as much as boys. A very good example is IAS Vandana Chauhan of Saharanpur district of Uttar Pradesh, she is from a conservative family, proof of women's strength. This is a proof that if we give women equal respect and opportunity as boys, then they can perform better than boys.

I am surprised to know that everyone in India wants a boy child because people believe that only descent from boys goes on and they become the support of old age. But the truth is that without girls there will be no society nor any dynasty. After all, why do girls only have to go to their in-laws after marriage? This can also happen if a parent has two girls, so that he can also bring the boys home after marriage. This will also end gender discrimination and also worry about people who will be supported by their old age. With this, both people will get equal respect. This is the time to end orthodox practices, only then the country will progress and all people will get equal rights and its initiative will be from us.

Discrimination against girls begins with the mother's womb and ends with her last breath. I think it is better to kill the girl in the womb of mother instead of suffering and inequality throughout life. This is something like torturing someone with torture. In our country, we talk about equality but today I ask the question 'how many men are there to do domestic work'? Nobody talked about this equality. If women earn equal to men in the family then why do men get more credit? Where women do double work. In our society every day the cases of divorce and family separation are increasing very fast, what is the reason behind this? I think on one hand we say that women are equal to men, they have been given full rights in the constitution. We have made them so educated and aware that they have come to know their rights. But society is not ready to accept those rights and neither does it give them equal rights, that is why the matters of family separation are increasing very fast in our country. This is in some way that we have formulated policies for the empowerment of women but did not create an environment where those policies can work.

After so many achievements, women of the 21st century are afraid to go out of the house. They face sexual harassment, rape, acid attacks, child marriages, emotional depression, going out of the house without permission, husband's violence, bullying and numerous challenges. Faces. Women are targeted and those abusive people are left without punishment for years and years. How is this justice? After all, why are those people not punished early so that any other person thinks a thousand times before committing that crime.

We need to make the path of women easier so that they too can achieve their goals easily and feel freedom. This will be possible only when we give good care to our children because the root of gender discrimination starts in childhood when we give more opportunities to boys and less opportunities to girls. A young child does not know whether he is weak or brave. The ideas of society make them weak or strong. The boy studies for himself but the girls study for the whole society. I request every parent to give equal opportunity to their daughter in every field and teach their son to always respect women. Recently Supreme Court ruling has given equal opportunity to women in the armed forces and ancestral lands. The government has also started many schemes for the progress of women, but all these schemes will be successful only when the society changes its mindset towards women. For the progress of the country, we have to end conservative thinking, only then will development be possible in the country. The day women and men start working together with equal opportunity, no one will be able to stop the progress of our country.


back to home page

307 views0 comments