देश में बढ़ती महंगाई हिला देगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी!

Updated: Aug 5

देश में रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं की कीमतें डेढ़ से दो गुनी हो गईं है। आप अगर सब्जी, दूध व किराने का सामान लेने बाजार में पहुंच रहें तो बिल एक हजार से 15 सौ तक का बन रहा। पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस की कीमतों में बेतहासा बढ़ोत्तरी हुई है। कीमतों के कम होने के आसार भी नहीं दिख रहें। यह सरकार के लिए बुरे संकेत हैं ।


ज्योति सिंह, नई दिल्ली। महंगाई एक ऐसी चीज है जो हमेशा ही खबरों में बनी रहती है। मुझे याद है जब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25, 50 पैसे या एक रुपये तक की बढ़ोतरी होती तो यह अखबारों के प्रथम पृष्ट की खबरें होती थी। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर भी दिनभर खबरें चलती थीं। यह अब भी है, लेकिन अखबारों में इसके प्रदर्शित करने के आकार को छोटा कर दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का इस ओर ध्यान कम हुआ है।

जो यह दर्शाता है कि यह अब अखबारों व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए आम बात हो गई है। हालांकि जब भी महंगाई अखबारों व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए आम बात हुई है, जनता के मन में आक्रोश बढ़ा है। इसी आक्रोश ने सरकारों का तख्ता पलट किया है। पिछले सात वर्षों से देश में राज करने वाली मोदी सरकार के भी शासन में आने का एक प्रमुख कारण देश में बढ़ती महंगाई ही थी। 2009 से 2014 तक कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार का कार्यकाल सबसे खराब माना जाता है। तब बड़े-बड़े घोटाले सामने आए। अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी। महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर थी। भ्रष्टाचार और महंगाई से आम लोगों में पनपे गुस्से ने ही भाजपा को पूर्ण बहुमत दिलाई। तब भाजपा ने 330 से भी अधिक लोकसभा सीटें जीतीं। पीएम नरेंद्र मोदी को जनता ने उम्मीद के साथ अपनाया था। एक बार फिर देश में महंगाई बढ़ रही है। ऐसे में 2024 में होने वाले चुनाव में प्रधानमंत्री को अपनी कुर्सी बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ सकती है। केंद्र के पास अब भी तीन वर्ष का कार्यकाल बचा है।


महंगाई नियंत्रण सरकार की प्राथमिकता में नहीं

अर्थशास्त्री अनमोल खुराना का कहना है कि महंगाई नियंत्रण सरकार की प्राथमिकता में अब नहीं है। सरकारों का उद्देश्य अब बदल गया है। चुनाव जीतकर शासन करना उनकी प्राथमिकता बन गई है। चुनावों में पानी की तरह पैसों का इस्तेमाल होता है। आधुनिकीकरण के नाम पर योजनाओं में अरबों रुपये खर्च किये जाते हैं। जनता पर टैक्स बढ़ाया जाता है। इससे उनकी जेबें और ढीली हो रहीं हैं। कोरोना काल में उद्योग-धंधे बंद हो गए हैं। कामगारों को पेट भरना मुश्किल हो रहा है। सरकार को महंगाई कम करने और लोगों की क्रय करने की शक्ति को बढ़ाना होगा।


सरकारी आंकड़ों में घट रही महंगाई, हमें आपको महसूस ही नहीं हो रही

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में महंगाई की दर सितंबर में घटकर 4.35 प्रतिशत रह गई है। एक महीने पहले अगस्त में यह 5.3 प्रतिशत पर था। सरकार की ओर से दावा किया गया है कि खाने-पीने की कीमतों में इस महीने 0.68 प्रतिशत की गिरावट हुई है। यह अगस्त में 3..11 प्रतिशत था। यह आंकड़े केवल दिख रहे, जनता को महसूस नहीं हो रहे। बाजार जाने पर पता चलता सरसों तेल की कीमतें दो गुनी हो गईं हैं। पेट्रोल-डीजल 110 रुपये प्रति लीटर के ऊपर कई जगहों पर चला गया है। रसोई गैस सिलेंडर रिफिल कराने में एक हजार से अधिक रुपये लग रहे हैं। ऐसे में कह सकते की यह सरकारी आंकड़े महज दिखावा हैं।


आईएमएफ ने भी महंगाई को लेकर जताई चिंता, बढ़ाई देश की महंगाई दर

आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) ने कहा था कि देश में इस वित्तीय वर्ष के अप्रैल में महंगाई दर 4.9 प्रतिशत रह सकती है। अब उसने इसे बढ़ाकर 5.6 प्रतिशत कर दिया है। आईएमएफ ने यह भी कहा है कि भारत जैसे देशों में तेजी से अब भी महंगाई बढ़ रही है। कोरोना काल में जहां अमीर देशों में महंगाई दर तेजी से और भारत में काफी कम रफ्तार से गिरी थी, अब वहां यह कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। दुनिया के इकोनॉमी में जहां सुधार हो रहा, वहां भारत में महंगाई बढ़ना सरकार के लिए भी घातक साबित हो सकता है।


इन देशों में थी गजब की महंगाई, 50 लाख में मिल रहे थे पांच टमाटर

महंगाई देश की अर्थव्यवस्था बताती है। यह नियंत्रित होना देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर होता है। यह जब सरकारों के नियंत्रण से बाहर होता तो पूरी अर्थव्यवस्था ही खतरे में आ जाती है। फिलहाल राहत की बात यह है कि हमारे देश में महंगाई दर अब भी पांच फीसद से नीचे है। 2018 में वेनेजुएला में महंगाई दर 929789.5 प्रतिशत थी। लातिन अमेरिका का यह देश कई कारणों से भारी महंगाई से हमेशा ही जूझता रहा है। 2018 के एक रिपोर्ट के मुताबिक वहां महंगाई इतनी बढ़ गई थी कि केवल पांच टमाटर की कीमत 50 लाख बेलिवर (वेनेजुएला की करंसी) हो गई थी। तब दक्षिण सूडान दूसरे नंबर पर था। वहां महंगाई दर 83.49 फीसद थी। तीसरे नंबर पर सूडान था। यहां 2018 में महंगाई दर 63.29 प्रतिशत थी। यमन चौथे नंबर पर था। वहां महंगाई दर 63.29 प्रतिशत थी। अर्जेंटीना पांचवे नंबर पर था। वहां महंगाई दर 34.28 प्रतिशत थी।


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Will rising inflation in the country shake Narendra Modi's chair?


The prices of items used in everyday life in the country have doubled from one and a half to two times. If you reach the market to get vegetables, milk and groceries, then the bill is being made from one thousand to 15 hundred. The prices of petrol, diesel and LPG have increased tremendously. There is no sign of the prices going down. This is a bad sign for the government.


Jyoti Singh, New Delhi. Inflation is something that always remains in the news. I remember when petrol and diesel prices were increased by 25, 50 paise or even one rupee, it was the front page of the newspapers. The news used to run throughout the day on electronic media too. It still is, but the size of its display in newspapers has been reduced. The attention of electronic media has decreased in this regard. Which shows that it has now become common practice for newspapers and electronic media. However, whenever inflation has become a common thing for newspapers and electronic media, resentment has increased in the minds of the public. This outrage has overthrown the governments. One of the main reasons for the Modi government, which ruled the country for the last seven years, was also due to rising inflation in the country. The tenure of the Congress-led UPA government from 2009 to 2014 is considered to be the worst. Then big scams came to the fore. The economy had collapsed. Inflation was at record levels. The anger among the common people due to corruption and inflation gave BJP an absolute majority. Then BJP won more than 330 Lok Sabha seats. PM Narendra Modi was adopted by the public with hope. Once again inflation is increasing in the country. In such a situation, in the elections to be held in 2024, the Prime Minister may have to struggle to save his chair. The Center still has three years' tenure left.


Inflation control is not in the priority of the government

Economist Anmol Khurana says that inflation control is no longer in the priority of the government. The purpose of governments has now changed. Governing by winning elections has become their priority. Money is used like water in elections. In the name of modernization, billions of rupees are spent in the schemes. Taxes are increased on the public. This is making their pockets more loose. Industries and businesses have closed during the Corona period. Workers are finding it difficult to feed. The government has to reduce inflation and increase the purchasing power of the people.


Inflation is decreasing in government data, but people are not realizing it

In the data released by the government, the inflation rate has come down to 4.35 percent in September. It was at 5.3 per cent in August a month ago. It has been claimed by the government that there has been a decline of 0.68 percent in the prices of food and drink this month. It was 3..11 per cent in August. These figures are only visible, the public is not feeling it. On going to the market, it is found that the prices of mustard oil have doubled. Petrol-diesel has gone above Rs 110 per liter in many places. It is costing more than one thousand rupees to refill the LPG cylinder. In such a situation, it can be said that these government figures are just a sham.


IMF also expressed concern about inflation, the country's inflation rate increased

The IMF (International Monetary Fund) had said that the inflation rate in the country could be 4.9 percent in April of this financial year. Now it has increased it to 5.6 percent. The IMF has also said that inflation is still increasing rapidly in countries like India. During the Corona period, where inflation rate fell rapidly in rich countries and at a very low rate in India, now it is increasing instead of decreasing there. Where the world economy is improving, rising inflation in India can prove fatal for the government as well.


There was tremendous inflation in these countries, five tomatoes were available for 50 lakhs

Inflation tells about the economy of the country. Controlling it is better for the economy of the country. When this is out of the control of the governments, then the whole economy is in danger. At present, it is a matter of relief that the inflation rate in our country is still below five percent. In 2018 the inflation rate in Venezuela was 929789.5 percent. This country of Latin America has always been struggling with high inflation due to many reasons. According to a 2018 report, the inflation there had increased so much that the cost of just five tomatoes was 50 lakh Bolívar (Venezuela currency). South Sudan was at number two then. The inflation rate there was 83.49 percent. Sudan was at number three. Here the inflation rate in 2018 was 63.29 percent. Yemen was at number four. The inflation rate there was 63.29 percent. Argentina was at number five. The inflation rate there was 34.28 percent.


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