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दोनों में से किसे श्रेष्ठ माना जाए ?

निश्चित तौर पर हममें से बहुत से लोग दोनों को ही अनुशंषित करने के अपने सार्थक तर्क देंगे, जिन्हें नकारा नहीं जा सकता परंतु ये सूक्ष्म समझ की माँग अवश्य करता है।

अपने अनुभवों से जनित ज्ञान जहाँ वास्तविक और प्रगाढ़ होता है वहीं दूसरे के अनुभव से प्राप्त सीख में वो प्रगाढ़ता नहीं होती।

निश्चित तौर पर स्वानुभव या कहें अपने अनुभव से प्राप्त सीख हमें एक व्यक्ति के तौर पर सजग व परिपक्व होने के अवसर देती है तो वहीं दूसरे के अनुभव से प्राप्त ज्ञान का अनुसरण हमें कम समय में एक बेहतर समझ स्थापित करने की सुविधा। परंतु यहीं मैं उस सूक्ष्म बिंदु की ओर आप सभी का ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा कि यदि कोई व्यक्ति एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए सिर्फ़ इसलिए सड़क का उपयोग न करे कि उसे स्वयं अपने परिश्रम से अपना रास्ता बनाकर अपने अनुभवों से अर्जित ज्ञान की सहायता से ही अपने गंतव्य तक पहुँचना है तो यह प्रक्रिया अधिक समय व परिश्रम की माँग करती है जिसमें मंज़िल तक पहुँचने में समय भी अपेक्षाकृत कहीं अधिक लगता है, लेकिन वहीं यदि वो व्यक्ति पहले से बनी सड़क पर चलकर अपने गंतव्य तक जाए तो परिश्रम और समय दोनों की बचत की जा सकती है।

जीवन में स्वयं संघर्ष कीजिए और सीखिए परंतु यदि आप इतने सौभाग्यशाली हैं कि आपको आपके परिजन, बड़े या हितमित्र अपना कोई अनुभव साझा करते हैं तो उसका लाभ उठाइए क्योंकि उसमें बुद्धिमानी है।


डॉ ऋषि शर्मा | वरिष्ठ प्रबंध संपादक

एस. चाँद प्रकाशन समूह लिमिटेड

एवं संस्थापक और प्रमुख

हिंदगी ,हिंदी है ज़िंदगी समूह


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