मैरिटल रेप में देश की अदालतों में अलग-अलग फैसले

Updated: Aug 5

नई दिल्ली। एक ही मामले में देश की हाईकोर्ट के अलग-अलग फैसले हो गए हैं। इसी साल जुलाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने मैरिटल रेप (पत्नी की मर्जी के बगैर संबंध बनाना) की याचिका को खारिज कर दिया था। अब बीते छह अगस्त को केरल हाईकोर्ट ने इसी मामले में पत्नी को इसका लाभ देते हुए फैमली कोर्ट के तलाक के आदेश को बहाल रखा है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला महिला के साथ ज्यादती को दिखाता है। वहीं, मुंबई सिटी एडिशनल सेशल कोर्ट ने भी पत्नी की इच्छा के बिना यौन संबंध बनाने को गैर कानून नहीं कहा है। हमारे देश में पहले से ही मैरिटल रेप के मामलों में अलग-अलग राय रही है। इस पर कानून की भी मांग होती है। अब कोर्ट के फैसले भी अलग-अलग हो गए हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने ठुकरा दी थी मैरिटल रेप के आधार वाली तलाक की अर्जी

जुलाई 2021 में मैरिटल रेप को आधार बनाते हुए वकील अनूजा कपूर ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर सुनवाई कर रहे थे। न्यायमूर्ति ने इसे साफ तौर पर खारिज कर दिया। कहा था कि कोर्ट के पास संविधान के अर्टिकल 226 के तहत शामिल विधान को बदलने की शक्ति नहीं है।


केरल हाईकोर्ट ने कहा, तालाक के लिए मजबूत आधार है पत्नी के साथ बलात्कार

केरल हाईकोर्ट में फैमली कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। फैमली कोर्ट ने पत्नी के साथ क्रूरता के आधार पर तलाक का फैसला सुनाया था। फैमली कोर्ट ने कहा था कि पत्नी की मर्जी के बगैर संबंध बनाना मैरिटल रेप है। इसके बाद पति ने केरल हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी थी। छह अगस्त 2021 को केरल हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई हो रही थी। तब न्यायमूर्ति ए मो. मुस्तक और कौसर एडप्पागथ की खंडपीठ ने कहा कि हमारे देश में मैरिटल रेप के लिए सजा का प्रावधान नहीं है, लेकिन तलाक का दावा करने के लिए यह मजबूत आधार है।


मुंबई के सेशन कोर्ट ने कहा, आरोपित पति ही है इसलिए दी जा सकती जमानत

13 अगस्त को मुंबई के सेशन कोर्ट में मैरिटल रेप का आरोप झेल रहे पति को एडिशनल सेशन जज संयश्री जे घराट ने जमानत दे दी। आरोपित पति ने याचिका दायर की थी। उसने कहा कि पत्नी की ओर से लगाए गए आरोप गलत हैं। न्यायमूर्ति ने कहा कि पति ने कोई गैर कानूनी काम नहीं किया है। इसलिए जमानत दी जा सकती है।


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